Journalism

Journalism, Environmental (Hindi)

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कोरोना से सीख

                         
                                                      -मोहन दास   

      कुदरत  के साथ खिलवाड़  की कीमत इन्सान को 
बहुत महंगी चुकानी पड़ सकती है l इन्सान को अपने  आप को सुधरने का समय ज़रूर मिलता है पर जब इंसान  अपनी 
खुदगर्ज़ी में अनदेखी करता है और दूसरों का भला तक नहीं चाहता तो एक दिन उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ता है l

    कुदरत के बनाये हुए नियमों का उलंघन करना,  वातावरण के साथ खिलवाड़ करना,  स्वछता का पालन न करना, चारों ओर  गंदगी फैलाना,  पवित्र नदिओं  को प्रदूषत  करना,  वायुमंडल को ज़हरीला बनाना,  अपने घरको, गली मौहल्ले  तथा सड़कों को गन्दा बनाये  रखना इत्यादि इंसान की फिदरत बन चुकी है l

     क्या  यह अक्लमंदी दर्शाता है कि हम अपनी ही न समझी ओर मूर्खता से अपने ही पाओं  पर कुल्हाड़ी मारे ओर अपनी आने वाली नस्लों के लिए घातक सिद्ध हों l कुछ ऐसा ही दुनियां  में नज़र आ रहा है यहाँ हर कोई  पैसे की होड़ में अंधा बना हुआ है l

    बस  पैसा आना चाहिए चाहे उसके लिए कुछ  भी करना पड़े ! खाने पीने  की चीज़ों में मिलावट करना,  दवा दवाइओं में मिलावट कर बीमारों की सेहत के साथ खिलवाड़ करना,  फलों सब्ज़िओं को ज़हरीला बना कर अधिक  मात्रा  में पैसे  कमाना,  ज़हरीला दूध बना कर अधिक मात्रा में पैसे लूटना,  ज़हरीली मिठाइयाँ बना कर लोगों से पैसा लूटना,  मिलावट वाले घी तेल बेचना इत्यादि l

        आखिर  यह सब किस काम का?   इन चीज़ों से तरक़्क़ी किस क्षेत्र   में हो रही है ?  नकली तथा ज़हरीली चीज़ें बना कर  इंसानियत पर धब्बा लगाना,  अपनी ही संतान के साथ खिलवाड़ करना,  अपनी सोच को खत्म करना तथा  अपनी आने वाली संतान का भबिष्य अन्धकार में डालना हैl

       इन्सान हो कर इंसानियत को खो देना,  खुदगर्ज़ी को हमेशां साथ रखना,  आपसी प्यार मोहब्बत,  अच्छी सोच तथा समझदारी से दूर रहना,  अच्छाई बुराई के बीच समझ का न होना,  केवल अपना ही सोचना,  अपने कार्य क्षेत्र  में ईमानदारी से काम न करना,  दूसरों को नुक्सान पहुँचाना इत्यादि ज़्यादातर देखने को मिलता है l

      अपनी प्रधानता  दिखाने के लिए इंसानियत को नज़र अंदाज़ कर देना,  अपनी ही वाहा -वाही  चाहना चाहे दुसरे का कितना भी नुक्सान क्यों न हो जाये,  दूरदर्शी  न होना,  खुदगर्ज़ी में रह कर  सीमित सोचना,  भविष्य  में परिणाम  का अभाव होना इत्यादि पूरी मानवता  के लिए घातक सिद्ध हो सकता है l

     सही दिशा  की ओर अपनी बुद्धि को न लगा कर 
विपरीत दिशा में लगाना,  मानवता के लिए खतरे पैदा करना,  इंसानियत पर ज़ुलम करना,  ईश्वर  को याद न रखना,  अपना मन हमेशा  क्रूरता से संचित रखना इत्यादि पूरी दुनियां में दिख रहा है l

       वर्तमान  में ज़ाय्दातर देश मानवता को नष्ट करने की होड़ में लगे हैं ! खतरनाक हथियार बनाकर उनका इस्तेमाल इंसानियत को मिटाने के लिए किया जा रहा है !  दर्दनाक  चीखें  उठ रही हैं ! कौन उनकी फरियाद को सुने ? 

      कुदरत  इंसान को संभलने  के लिए बहुत मौक़े  देती हैं ! मगर,  अगर इंसान न ही तो समझता  है ओर न ही सम्भलता  है तो कुदरत स्वयं उसको सबक सिखा  देती है !  कुदरत के बनाये हुए  कानून  को कोई तोड़ नहीं  सकता है  ! वो चाहे  तो  पूरी सृष्टि  को एक पल से भी कम  समय में खत्म  कर दे ओर इंसान यो अपने को शक्तिशाली  समझता है कुछ भी न कर पाए ओर लाचार  नज़र आये l

      आज  हम अपनी आँखों के सामने  देख रहे  हैं कि  कोरोना नामक  एक छोटे से वाइरस  ने पूरी दुनियां में हाहाकार मचा रखी है !  हज़ारों  लोग रोज़ाना  इसकी बलि चढ़ रहे हैं !  बड़े  बड़े  शक्तिशाली   देश इसके सामने  कुछ नहीं कर पा  रहे ओर असहाय  होकर बैठे  हैं ! लाखों घर उजड़ गये हैं ! चारों  ओर  त्राहि  त्राहि  हो  रही है ! 

     कोरोना  भले  ही चीन  देश की  देन  है  पर  होता वही  है जो ऊपर  वाले  को मंजूर  होता है ! आज दुनियां अपने अपने घरों  में सिमट कर बैठी  है ! चारों ओर सनाटा,   सड़कें  सुनसान,  ट्रेनों , गाड़ियों,   हवाई  जहाज़ों  द्वारा  आबाजाही  बंद,  कल - कारखानों   के धुऐं  बन्द  ओर हर इंसान सहमा  सहमा सा है l   

    कुदरत  में इतनी ताकत  है कि वो अपने पर्यावरण को चाहे तो बचा  भी सकती है और  खत्म  भी कर सकती  है ! शायद  इस वार उसने हमें  एक और मौका दिया है सम्भलने  का ! ईश्वर की कृपा  से शायद  हालात कुछ ही हफ़्तों दिनों में ठीक हो जाएँ  और उससे हमारी प्रार्थना भी यही है कि हमें  संभलने  का एक और मौका मिले ताकि हम फिर से 
अपनी अपनी जिम्मेबारी  समझकर अपने फ़रज़  निभाएं ! एक दुसरे के प्रति प्रेम की  भावना हो,  एक दुसरे का भला  चाहें,  समाज देश दुनियां के लिए मिल कर काम करें,  खुदगर्ज़ी से बाहर निकलें,  ख़तरनाक हथियार बनाने की जगह मानवता के उदार के लिए चीज़ेँ बनायें जिस में सभी का भला हो,  अपने अपने देश कि तरक़्क़ी  के लिए एक जुट हो जाएँ और खुदगर्ज़ी की सियासत  से बाहर निकलें,  जिस बात में सब की भलाई हो उस में साथ दें,  स्वच्छता का पूरा ध्यान दें,  जीव जंतुओं को मारने और खाने की बजाय उनको बचाया जाये ! यह सब करने से कुदरत भी राजी और हमारे चारों और वातावरण तथा पर्यावरण  भी खुशनुमा होगा तथा ईश्वर की कृपा दृष्टि भी हम सभी पर बनी रहेगी और कोरोना जैसा कष्ट फिर कभी नहीं आएगा l

                                                          -जय हिन्द   

                              ******         

            

    








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