जब सपने हैं बड़े बड़े

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जब सपने हैं बड़े-बड़े तो प्रयास इतने छोटे क्यों जब चलना है हर हाल में तो हताश होके रोते क्यों खोल आंखें पूछ खुद से क्या करने तू आया था कि ना उठे सवाल कभी क्या इसलिए तुझे बनाया था उठ गिर संघर्षं कर हार जाना ना विकल्प है निराश हो तो पूछ खुद से मेरा क्या संकल्प है हाथ खुद ही का थाम ले कर विश्वास अपने विश्वास पर यह दुनिया तुझे डगमगाएगी रहना अटल तू अपने प्रयास पर क्यों शिकायतें हैं किसी से मझधार में ना किसी ने हाथ दिया तू पूछ खुद से मुसीबत में तूने कितना किसका साथ दिया.... बन ज़ौहरी परख खुद को सुधार अपनी हर खता.. तो क्या हुआ सब छोड़ गए चल खुद से ही अब प्यार जता.... -मनीषा कांडपाल?

जब सपने हैं बड़े-बड़े
    तो प्रयास इतने छोटे क्यों 
  जब चलना है हर हाल में
    तो हताश होके रोते क्यों

          खोल आंखें पूछ खुद से 
क्या करने तू आया था
   कि ना उठे सवाल कभी
           क्या इसलिए तुझे बनाया था

            उठ गिर संघर्षं कर 
हार जाना ना विकल्प है
       निराश हो तो पूछ खुद से
    मेरा क्या संकल्प है

 हाथ खुद ही का थाम ले
      कर विश्वास अपने विश्वास पर  
      यह दुनिया तुझे डगमगाएगी 
    रहना अटल तू अपने प्रयास पर

       क्यों शिकायतें हैं किसी से
  मझधार में ना किसी ने हाथ दिया
    तू पूछ खुद से मुसीबत में 
तूने कितना किसका साथ दिया....

   बन ज़ौहरी परख खुद को 
  सुधार अपनी हर खता..
     तो क्या हुआ सब छोड़ गए 
 चल खुद से ही अब प्यार जता....

         -मनीषा कांडपाल?

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